1. सुबह सुबह एक कोयल पेड़ पर गीत गा रही थी.
यह मेरे लिए एक बहुत ही प्यारा "सुबह का अलार्म" साबित हुआ.
प्रकृति में कई प्रकार के पक्षी हैं।
उनके रंग, आकार और बनावट में अलग-अलग होते हैं।
परंतु ईश्वर ने उनकी गले ( throat) में अलग-अलग तरह के संगीत वाद्य यंत्रों को बिठाकर, एक अनोखा गुण उनको दिया है.
हर पक्षी की अपनी एक अनोखी जादुई आवाज़ होती है.
आइए हम प्रकृति का धन्यवाद करते है, जिसने हमें ये अनोखे अनुभव दिए.
2. पूरब में उगने वाले हे गगनराज सूर्यदेव हि है,
आप के दिव्य तेज से पुरा आसमंत जगमग गया है.
आप हि से पुरी सृष्टी का जीवन बना है,
किंतू आपको तो हमसे ना फूल ना पत्र की भी अपेक्षा नहीं है.
आप की दि हुई हर चीज के प्रति आप से कृतज्ञता व्यक्त करते हुए,
आप से तेजस्विता,नियमितता जैसे अनेको गुण हम सब में आए ऐसी प्रार्थना करते है.
3. ठंडि सुहानी हवा के झोको ने लाई मोगरे की खुशबू,
जिसने खिंच लिया मुझे पौधौ के पास.
ताजगी भरी खुशबू ने मन को उल्हासित किया.
Thank you ऐ हवा के झोके ,
Thank you मोगरे के फुलों,
आप दोनो ने आज का मेरा दिन खुशियों से भर दिया.
4. यह जापान का चेरी ब्लॉसम (गुलाबी फूल वाला) पेड़ है।
पेड़ कभी गुस्सा, दुखी या उदास नहीं होते।
वे हमेशा बिना किसी उम्मीद के कुछ न कुछ देते रहते हैं।
जब मौसम आता है तो सारे पेड़ फूलों से लद जाते हैं।
मुझे लगता है कि पेड़ों की हँसती हुई अभिव्यक्ति उनके फूल होते हैं।
ड़ों की तरह हमें भी हमेशा दूसरों को और खुद को भी खुशी देना चाहिए —
अपनी आंतरिक चेतना से, अपनी गहरी आत्मा से और खुले दिल से।
5. जलधाराओं को देखके किसी का भी मन शांत हो जाता है.
पहाडों से यह जल उछलता गिरता नदी बनके सागर में समा जाता है.
अनेको चट्टानो, पथ्थरों से अपनी राह बनाके अपनी मंजिल पाता है.
जल स्वच्छ,शितल,शुद्ध, सृजनशील, अमृतसम, सुजलाम, सुफलाम, मन की प्यासबुझानेवाला,दुसरोंको जीवन देनेवाला है.
हम सब ने पानी का सम्मान करते हुए उसका सदुपयोग करना चाहिए.
आईये हम सब उससे, उसके अनेको गुणों को अपने भितर प्रवाहित होने का आवाहन करते है.
6. सिमेंट कि जंगलो में भी एक पेड सुर्य का ताप सहते हुए,
अपनी शितल छाया मुफ्त देके आनेजाने वालों का श्रम परिहार करके उन्हे आनंदित कराता है
वैसे हि हम सभी लोगो ने अगर थान लिया तो
हमारा सहवास सब को शितलता, खुशी और प्रसन्नता दे सकता है.
आओ हम सब सृष्टी के पेडों से कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उसकी यह अनमोल विशेषतः
को हमारे व्यक्तित्व में आने की प्रार्थना करते है.
7. अभी कुछ दिनोंसे मैने धरती माँ से जुडना सिखा,
तबसे मन को एक अलगसा सुकून मिल रहा है.
माँ धरती के हम सब प्राणियों पे अनंत उपकार है.
हम उनको इतना कष्ट देते हुए भी वह हमे कभी भी प्यार करना नहीं छोडती है.
सबका भार संभालना , पानी के स्त्रोत देना, पेड पौधे देना, अनेको पहाड, मिट्टी, खनिज वगैराह् अनेको
संसाधनो को वह उपहार के रूप में देती है.
हमारा शरीर पंचतत्वों से बना है.
जिसमे पृथ्वीतत्व 12% की मात्रा मे विद्यमान है.
हमारे भीतर जो हड्डियां तथा मांसपेशीया के स्वरूप में अहम भूमिका निभानेवाला यह तत्व है.
आओ चले, धरती माँ से प्रथम माफी मांगके ,
उन्हे अपने दिल से नमन करके,
उनके विशेष गुण ममता,रक्षण करना,
संभालना,आधार देना
जैसे अनेको गुण हम सब में आए
एवं हमारी संरचना जो हड्डीया और मांसपेशीया को मजबूत कराने की प्रार्थना करते है.
8. क्यो इस पेड पे इतनी सारी यह सुवर्णमयी फुलों की बहार आई है?
क्या इन्हे कोई इनाम मिलना हैं या increment या कोई बडा प्रमोशन मिलना है.?
Nature को इन सबकी कोई जरुरत नहीं ना चाह भी नहीं.
यह तो बस अपनी मस्ती मे अपना दिया हुआ काम 100% या super duper हि करते है.
क्यो हम ऐसा नहीं सोचते है? ....
आईये हम सब आज से हमारी सोच बदलते है.
Nature से उसकी यह सकारात्मकता, शुद्ध भाव, प्रामाणिक सोच को नमन करते हुए ,
इन भावनाओंको हमे प्रदान करने की प्रार्थना करते है.
9. प्रकृति मे इतनी सारी शक्तीया है, जिनका हमे अंदाजा भी नहीं है.
कुछ महिने पहले मेरे सोसायटी के पार्क के कुछ पेड एक बडी आँधी में पुरे उखड कर
पुरे के पुरे निकलकर जमिन पे गिर गये.
उनको 2-3 दिन में हि फिरसे बडे लकडी के आधार से खडे करवाये गये.
अब यह फिरसे बिना कोई मेडिसिन, ना कोई ऑपरेशन से फिरसे खिल उठे.
धरती माँ ने उनको अपनी गोद में फिरसे पनाह दि.
आकाश की माया, हवा की झोकोने उसे खिलखिलाया, सूरज ने उसे अपनी गर्मी दि और पानी ने उसे ममता से सिंचा.
पुरी कायनात ने उन्हे नया जन्म दिया.
जैसे प्रकृती कठीन परिस्थिती मे एक दुसरे की सहायता करने जुट जाती है.
आईये चले, हम सब प्रकृती से उनकी यह विशेषता को नमन करते हुए
हमारे भितर उन गुणो और शक्तीयों को अपने व्यक्तित्व मे समाने की प्रार्थना करते है.
10. देखी आप ने कारीगिरी ?
यह प्रकृति बडा हि जादुई कारिगर है.
यह एकही पेड है, nichla हिस्सा और दुसरे फोटो में उपरका हिस्सा.
है ना यह नायाब आर्टिस्ट.
उसका तना ( बुंधा) लग रहा हैं जैसे 10-12 अलग अलग पौधो से बना है, किंतू वह एकही है.
प्रकृति हर एक उसकी बनाई चीज को सुंदर, नायाब और अलगसा बनाता है.
क्यो ना हम सब प्रकृती की तरह हर चीज सुंदर बनाना, सुंदर सोच और कृती करना, कुछ अलगसा हटके करना सिखे.
आओ चले हम सब प्रथम प्रकृती को नई सोच देने के लिये आभार मानते हुए नमन करते है और उसकी जादुई कल्पनाओं को हमे प्रदान करने की प्रार्थना करते है.
11. पौधा अपनी विशेषतः निगेटिव्ह आसपास होते हुए भी अपनी सकारात्मकता नही छोडता,
अपने मस्ती में खुलता और बहरता है.
वैसे हि हमने कैसी भी परिस्थितीया हो,
अपना निर्मल, सुंदर स्वभाव न छोडते हुए
खुद कि खुशी के साथ सब को खुशी, आनंद देना सीखना है.
12. सुबह सुबह छा गई काली काली बदरिया,
हवा कि झोको ने लाई संग बारिश की लडिया,
जो है हमे प्राणशक्ती देनेवाला,
आओ चले, आज आकाश,हवा , काली घटा
और पानी का स्वागत करके उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते है.
13. प्रकृति में हर जगह माँ अपने बच्चों के प्रति एक जैसी भावनाएँ रखती है।
चाहे वह जानवर हो, पक्षी हो, मछली हो, मनुष्य हो या धरती माँ —
सभी में वही ममता होती है।
इसलिए, पवित्र हृदय से हर माँ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें।
14. पतझड यह एक सृष्टी का नियम है.
बहार के बाद धीरे-धीरे पेड पतझड कि और चलता है.
कुछ समय विश्रांती लेके फिरसे नवनिर्मिती की ओर बढता है और फिरसे बहरता है.
इसी तरह मनुष्य को भी अनेको उतार चढाव, सुख दुख का सामना करना होता है.
किंतू मनुष्य अपने नसीब को, भगवान को वै. दोष देता
रहता है.
क्यो न हम प्रकृति कि तरह विश्राम क्यो नहीं करते है?
आज अंधेरा हुआ तो कल फिरसे नई सुबह तो आयेगी,
यह क्यो नहीं सोचते है? आईये चले इस सृष्टी का नियम अपनाते है,
और हमारे स्वास्थ्य, सुख दुख , उतार चढाव पे नई सुबह की राह की तरफ बढते है.
15. ईश्वर को शुक्रिया करने के लिए हजारो कारण है, किंन्तू उनमेसे कुछ नायाब कारण जो मेरे पढने में आए . किसी ने बहोत खुबसुरतीसे लिखे है.:*
1. *टायर चलने पर घिसते हैं, लेकिन पैर के तलवे जीवनभर दौड़ने के बाद भी नए जैसे रहते हैं।*
2. *शरीर 75% पानी से बना है, फिर भी लाखों रोमकूपों के बावजूद एक बूंद भी लीक नहीं होती।*
3. *कोई भी वस्तु बिना सहारे नहीं खड़ी रह सकती, लेकिन यह शरीर खुद को संतुलित रखता है।*
4. *कोई बैटरी बिना चार्जिंग के नहीं चलती, लेकिन हृदय जन्म से लेकर मृत्यु तक बिना रुके धड़कता है।*
5. *कोई पंप हमेशा नहीं चल सकता, लेकिन रक्त पूरे जीवनभर बिना रुके शरीर में बहता रहता है।*
6. *दुनिया के सबसे महंगे कैमरे भी सीमित हैं, लेकिन आंखें हजारों मेगापिक्सल की गुणवत्ता में हर दृश्य कैद कर सकती हैं।*
7. *कोई लैब हर स्वाद टेस्ट नहीं कर सकती, लेकिन जीभ बिना किसी उपकरण के हजारों स्वाद पहचान सकती है।*
8. *सबसे एडवांस्ड सेंसर भी सीमित होते हैं, लेकिन त्वचा हर हल्की-से-हल्की संवेदना को महसूस कर सकती है।*
9. *कोई भी यंत्र हर ध्वनि नहीं निकाल सकता, लेकिन कंठ से हजारों फ्रीक्वेंसी की आवाजें पैदा हो सकती हैं।*
10. *कोई डिवाइस पूरी तरह ध्वनियों को डिकोड नहीं कर सकती, लेकिन कान हर ध्वनि को समझकर अर्थ निकाल लेते हैं।*
*ईश्वर ने हमें जो अमूल्य वस्तुएं दि हैं, उनके लिए उनका आभार मानिए और उससे शिकायत करने का हमें कोई अधिकार नहीं है।*
**हर रोज़ सुबह हमारा जगना अपने आप में एक चमत्कार है!*
*इसलिए अपने शरीर के साथ उस सर्वशक्तिमान ईश्वर का धन्यवाद करें।**
16. माँ प्रकृती हम सब की झोली अपनी ममता
और प्यार से अनगिनत उपहार हमे प्रदान करती है,
आओ चले हम सब माँ प्रकृती का आदर के साथ
सन्मान करते हुए उसे नमन करते है.
17. बहरलीस माझ्या अंगणात तू गं सदाफुली,
हिरव्या पानापानांतून डवरली आणि सजली.
रंग तुझा गं साजिरा गोजिरा,
कळतो मला तुझा स्वभाव हसरा.
नसेल तुजकडे स्वर्गीय गंध,
परी खुलून मोहवतेस मंद मंद.
नाही मिळत जरी तिला देवाचे चरण,
कधी ना रुसते ना दुःखी होते अकारण.
घ्यावा असा तिचा गुण हसरे राहून फुलण्याचा,
कधीतरी यावा तिला योग ईश्वरचरणी अर्पित होण्याचा.
18. आज सुबह आप को किसने जगाया? अपने आप हि हम सब जगते है ,
उसके लिये अलार्म की कोई जरुरत नहीं होती.
अपने शरीर में हि एक जादुई घडि ईश्वर ने बिठाई है.
सुबह जगना, भूक, प्यास कि संवेदना देना, ग्रहण किये अन्न को पचाना,
समय पे निंद आना, इत्यादी अनेको कार्य अपने आप होते रहते है.
उस शरीर को हमने अत्यधिक सावधानी से संभालना है.
उसे पिडादायक आदतो से परेशान नहीं कराना है.
आईये चले आज हम अपने जनम से प्राप्त हुए शरीर और उसकी प्रणाली
से वंदन करते हुए सब से पहले उससे माफी मांगके उसके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते है.
19. हवा के बडे झोके, आकाश में काले काले बादलों की गर्जना,
बिजली का कडकडाना, और बारिश की बौछार इन सब ने मिलके आज की सुबह का स्वागत किया.
सुबह की सैर के लिये हम दो चार सहेलियां यह सब एन्जॉय करने निकले.
बारिश का आना कितना मन लुभावंना होता है.
तपती गर्मी में यह एहसास मन मोह लेता हैं.
आकाश, हवा, बादल इन सब का कितना एहसान हैं, हम सब पे,
जो वर्षा करके सभी प्राणिजात, पेड पौधो के साथ साथ तृषार्त धरित्री की भी प्यास बुझाता है.
आज चले वर्षा की धाराओं में मन को उल्हासित करके,
उन्हे वंदन करते हुए, उनके विशेष गुणों को हमे प्रदान करने की प्रार्थना करते है.
20. फुले हो तुम,जैसे वसंत की आयी हो बहार,
देखके तुमको मन मेरा डोल गया जैसे आयी है फुहार.
अंग अंग पर तुमने लाई है खुशी से बहार,
दिल कहता हैं ले लू तुम्हांरी खुशी मै उधार.
लगता है मुझमे पां लू मै तुम्हारे जीवन जीने की उर्मी,
ऐसेही खुश रहना, रिझाना और सृष्टि में समा जाना ऐसी है मेरी अर्जी.
आईये इन फुलों की तरह हमारा जीवन भी उत्साहभरा, खुशनुमा, दुसरों को आनंद देनेवाला हो,
ऐसी प्रार्थना इनसे करके इन्हे नम्रता से वंदन करते है.
21. माँ प्रकृती हम सब की झोली अपनी ममता और प्यार से अनगिनत उपहार हमे प्रदान करती है,
आओ चले हम सब माँ प्रकृती का आदर के साथ सन्मान करते हुए उसे नमन करते है.
22. एक पेड है आवले का, दुसरा है आम का.आप कहोगे इसमे क्या बडी बात है.
यह सिर्फ एक उदाहरण है.
माँ प्रकृती ने हमे इतने सारे अनगिनत उपहार दिये है, उनकी कोई गणना नहीं कर सकते.
यह वृक्ष, लता, पौधे, दुर्वा, उनकी मूली (मूळी),जटाए( पारंब्या),
पत्ते, फूल, फल,पुंकेसर, उनकी फलिया (शेंगा),
पेडो कि छाल(साल), उनका तना (बुंधा), उनकी टहानिया (फांद्या), etc.etc.
यह सब हमे औषधी रूप में माँ प्रकृती ने,वरदान स्वरूप प्रदान किया है.
हमारा पुरा आयुर्वेद हि उसपे निर्भर हैं. और क्या विशेषतः सुनाऊ?
आईये चले आज हम सब माँ प्रकृती का तहे दिलसे शुक्रिया
अदा करते हुए नतमस्तक होके वंदन करते है.
23. आसमान को सुशोभित करनेवाला चंद्रमा सभी को मोह लेता है.
हजारो गाने इसपे लिखे और गाये गये है.
चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से धरती पे समुंदर में ज्वार भाटा ( भरती ओहोटी) आते हैं.
मनुष्य का शरीर 70% पानी के अलग अलग रुपों में बना है.
इसिलिये चंद्रमा हमारे शरीर को भी प्रभावित करता है, इसकी विज्ञान ने भी पुष्टी कि है.
आयुर्वेद और ज्योतिषविद्या अनुसार चंद्रमा हमे शांतता, शितलता, स्वास्थ्य ,
मन की स्वस्थता, तनावमुक्त ऐसे अनेको गुण विशेषता प्रदान करता है.
आईये चले हम चंद्रमा को हृदय से वंदन करके हमारे शारीरिक
और मानसिक स्वास्थ्य के लिये प्रार्थना करते है.
24. चाँदनी वाली रात किसे पसंत नहीं?.
देखने मात्र से हि हमारा मन खिल उठता है और शितलता का एहसास होता है.
चाँदनी/ तारा स्वयंप्रकाशित होता है.
हमारा सबसे नजदीकी तारा तो हमारा सूर्य हि तो है.
वैज्ञानिक, खगोलशास्त्र और ज्योतिष्यशास्त्र में तारों का बहोत महत्त्व है.
प्राचीन समय से तारों का उपयोग दिशा दर्शक के लिये किया जा रहा है.
ध्रुव तारा और सप्तर्षी तारासमूह से उत्तर दिशा का अनुमान लगाया जाता है.
आईये चले हम सब इस आसमाँ कि शोभा बढानेवाले तारों को हृदय से नमन करके
उनके जैसे स्वयंप्रकाशित(स्वज्ञान से प्रकाशित) होने कि प्रार्थना करते है.
25. आज हम आराधना करते है, ब्रह्मांड रचेता, निर्माता,नियंत्रक,
सर्वाधीश, सृष्टीकर्ता ईश्वर कि.
ईश्वर निर्गुण( निराकार) और सगुण ( साकार) इन दोनो रूप से प्रविष्ट है.
जो सृष्टी कि उत्पत्ती,पालन और संहार करते है.
अतः वे सर्वव्यापी है. सजीव,निर्जीव सभी के कण कण में बसते है.
हम सब सजीवों के हृदय में अदृश्य रूप में विराजमान है.
ईश्वर का अनुभव भक्ती,प्रेम,विश्वास और ध्यान से कर सकते है.
यह सब सिर्फ मानव जन्म में हि संभव हो सकता है.
आईये चले हम सब साथ मिलके उन ब्रह्मांडधीश ईश्वर की मनोभावना से,
हमे मानव योनी में जन्म देने और सद्सद्विवेक
बुद्धी,मन,विचार करने की शक्ती और ज्ञान,
आनंद का भंडार देने के लिए कृतज्ञता पूर्वक नमन और वंदन करते है.
26. हमारे सर पे ईश्वर ने बडी राजेशाही छत (आकाश, space) बनाके हमे प्रदान कि है.
आकाश हमारे पंचतत्वों मेसे एक बहोत एहम तत्व है.
जिसने सारा ब्रह्मांड समांया हुआ है.
जो अंतहीन, अनंत, विशाल होते हुए भी सूक्ष्म है.
हम सबके शरीर में यह तकरीबन 6 % मात्रा में विद्यमान है,
तभी तो जैसे खून का बहना, ऑक्सिजन का शरीर मे घुलना ऐसी हजारो क्रियाए संभव होती है.
हमारा बोला हुआ शब्द आकाश की माध्यम से हि तरंगो से सुना जा सकता है.
सभी की आवाज, रेडिओ, टीव्ही, मोबाईल, etc. यह सबको सुनना संभव होता है.
आकाश में बादल छाते है तभीं तो हमे बरसात से जीवन(पानी) प्राप्त होता है.
इसके बिना धरती पे जीवनही संभव नहीं.
ऐसे अनेको विशेषताए आकाशतत्व में समाई है.
आईये आज हम सभी आकाशतत्व को दिल से धन्यवाद करके,
उनसे हमारी सोच में विशालता, शुद्धता,
सब को समा के भी निगर्वित रहने की शक्ती और आकाश के जैसे
हमारा जीवन रंगबिरंगी खुशियों से भरे यह हमे प्रदान करने की प्रार्थना करते है.
27. आज हम सब अपने शरीर से कृतज्ञता व्यक्त करते है.
मेरी पवित्र आत्मा का, हे शरीर, तुम एक सुंदर मंदिर हो.
इस संसार में तुम सच्चे साथी हो.
मेरे लिये तुम जन्म से लेके अभितक नॉनस्टॉप काम कर रहे हो,
वो भी बिना कोई शिकायत और वेतन के.
जीवन की भागदौड मे मैने तुम्हारे स्वस्थ जरुरतों पे अच्छे से ध्यान नही दिया,
इसलिये आज मैं सब से पहले तुमसे क्षमा मांगती हुं.
तुम मेरे लिये बिना कुछ चाहें इतने सारे काम करते आ रहे हो, उसके बारे मे, मैं बिलकुल अनभिज्ञ हुं.
ईश्वर ने दिया हुआ एक
अनमोल उपहार हो तुम.
हे मेरे शरीर आगे से मैं आप का खयाल रखुंगी.
मैं स्वस्थ आदतों को बढावा दुंगी.
आप ने जो अब तुम दिये हुए साथ का कृतज्ञता पूर्वक सन्मान करते हुए वंदन करती हू.
28. आज करेंगे हम मन की बात.
मोदीजीवाली नहीं, हम सब के मन कि बात.
विज्ञान के अनुसार, मन कोई भौतिक अंग नहीं है.
यह पुरे शरीर में चेतना के रूप में व्याप्त है और उसका केंद्रबिंदू मस्तिष्क है.
अध्यात्म और आयुर्वेद अनुसार मस्तिष्क के साथ साथ हृदय भी मन का काम करता है.
मन कि गती तो प्रकाश कि गती से भी हजारो गुना ज्यादा हैं.
हम इस गती से कही पर भी मन से पोहोच सकते है.
मन ने ईश्वर को सोचा तुरंत ईश्वर के पास पोहोच जाते है.
इसिलिये हमे मन की ज्यादा गती ईश्वर ने दि है.
आईये चले आज अपने मन और विचारों को कृतज्ञता पूर्वक धन्यवाद करते है
और हमे मानसिक शांती, तनाव कम होना और सकारात्मकता बढाने के लिये मन से प्रार्थना करते है.
29. कल हमने बात कि अपने मन की.
चलिये, आज मन के घोडे को काबू में रखनेवाली बुद्धी कि बात करते है.
बुद्धी याने सकारात्मक सोच विचार करके, तर्क लगाके सही गलत का फैसला करके उसी का आचरण करना.
बुद्धि मस्तिष्क की वह
कार्य-क्षमता है जो हमें सही-गलत में अंतर करने,
समस्याओं को सुलझाने और निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करती है.
हमारा मन जब अशांत होता है, बहोत सारे अनियंत्रित विचारों से भरा रहता है ,
तब बुद्धी की सहायता से उसे सही रास्ते पे लाना होता हैं.
नहीं तो बार बार ऐसे होने से बहोत सारी व्याधीया जकड लेती है.
आईये चले आज हम सब अपनी बुद्धी को धन्यवाद कहते है और सकारात्मक
तरीकेसे जीवन कि आत्मउन्नती की तरफ बढते है.
30. आज हम बात करते है, थोडेसे दुर्लक्षित/ जल्दी ध्यान नहीं आनेवाले कोशिकाओंकी.
कोशिकायें मानव शरीर में 37-40 ट्रिलियन ( 1 ट्रिलियन=1 लाख करोड) इतनी मात्रा में होती है.
कोशिकाएं आपस में मिलकर (Tissues) बनते हैं.
ये tissues मिलकर अंग (Organs) जैसे - हृदय, फेफड़े, मस्तिष्क आदि बनते हैं.
अंततः, विभिन्न अंग मिलकर एक संपूर्ण अंग प्रणाली (Organ System) और मानव शरीर का निर्माण करते हैं。
याने की एक ब्रह्मांड ही बसा है शरीर में.
मानव शरीर में लगभग 200 विभिन्न प्रकार की कोशिकाएं पाई जाती हैं, जो शरीर के अलग-अलग कार्य करती हैं.
ऊर्जा का निर्माण: जो भोजन और ऑक्सीजन को ऊर्जा में बदलता है. इसी ऊर्जा से शरीर के सभी कार्य चलते हैं.
संरचना और सहारा देना: ये त्वचा, हड्डियों और अंगों को आकार और मजबूती प्रदान करते है.
ये पोषक तत्वों को अवशोषित करती हैं और चयापचय (metabolism)
के बाद बचे जहरीले या बेकार पदार्थों को बाहर निकालती हैं।
डीएनए का संरक्षण: केंद्रक (Nucleus) में मौजूद डीएनए कोशिका के निर्माण,
विकास और कार्यों को नियंत्रित करता है और इसे अगली पीढ़ी में स्थानांतरित करता है.
विभाजन और मरम्मत: पुरानी या नष्ट हो चुकी कोशिकाओं की जगह नई कोशिकाएं बनती हैं
और चोट या घाव को भरती हैं.
रोगों से बचाव: श्वेत रक्त कोशिकाएं (WBC) बाहरी बैक्टीरिया,
वायरस और संक्रमणों से लड़कर शरीर की रक्षा करती हैं.
न्यूरॉन्स (Neurons): ये मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की कोशिकाएं होती हैं,
जो सिग्नल्स का आदान-प्रदान करती हैं.
मांसपेशीय कोशिकाएं (Muscle Cells): शरीर को हिलने-डुलने और काम करने की शक्ति देती हैं।
यह इनके अनेकोमेसे कुछ काम होते है.
आपने कभी अपनी कोशिकाओंको धन्यवाद किया है?? मैने तो इनको इतना कभी गौर ही नहीं किया था.
जब details में पढा तो पता चला.
आईये चले आज हम हमारी 37-40 ट्रिलियन कोशिकाओंसे सन्मान पूर्वक, प्रेमपूर्वक धन्यवाद/ Thank you कहते है,
और उनकी कार्य प्रणाली अच्छेसे चलते रहने की प्रार्थना करते है.
31. आप सभी ने कभी अपने शरीर में चलने वाली रक्त नलिकांओं को कृतज्ञता पूर्वक धन्यवाद किया है?
नहीं ना किया, मैने भी नहीं किया था, किंतू स्कूल में पढने बाद आज फिरसे उनके कार्य को गौर से देखते/ सोचते हैं.
मानव शरीर में 5-5.5 lt. रक्त होता है. वह दिनरात नॉनस्टॉप शरीर में घुमता है.
हृदय, धमनियों, नसों और केशिकाओं का एक नेटवर्क है। इसका मुख्य काम पूरे शरीर में ऑक्सीजन, पोषक तत्व, और हार्मोन पहुंचाना तथा कोशिकाओं से विषैले पदार्थों को बाहर निकालना.
धमनियां (Arteries): ये शुद्ध (ऑक्सीजन युक्त) रक्त को हृदय से शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ले जाती हैं。
शिराएं (Veins): ये अशुद्ध (कार्बन डाइऑक्साइड युक्त) रक्त को शरीर के अंगों से वापस हृदय तक लाती हैं。
केशिकाएं (Capillaries): ये बहुत महीन रक्त वाहिकाएं होती हैं जो धमनियों और शिराओं को आपस में जोड़ती हैं और कोशिकाओं तक पोषक तत्वों का आदान-प्रदान करती है.
यदि सभी रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को एक लाइन पर रखा जाए,
तो वे एक बच्चे में लगभग 60,000 मील लम्बी होती हैं और एक वयस्क में लगभग 100,000 मील लम्बी होती हैं.
रक्ताभिसरण क्रिया कितनी महत्वपूर्ण है यह सबको पता है हि.
आज हमने सिर्फ इनके कार्य को दोहराया है, ताकी हम उनके प्रति दिलसे महत्वपूर्ण व्यक्त कर सके.
तो, सभी धमनियों, शिराओं और केशिकाओं को धन्यवाद, जिन्होनें खुद अविरत काम करके हमारा जीवन सुवाहक रखा है.
32. आज हम अपनी बहोत महत्वपूर्ण शरीर को चलानेवाली अंतःस्रावी ग्रंथियो के बारे में सोचते है.
अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) ग्रंथियों और organs का एक जटिल नेटवर्क है.
यह system सीधे रक्तप्रवाह में 'हार्मोन' नामक chemicals छोडते है जो संदेशवाहक जैसा काम करते है.
प्रमुख अंतःस्रावी ग्रंथि :पिट्यूटरी ग्रंथि (Pituitary Gland): इसे 'मास्टर ग्लैंड' भी कहा जाता है क्योंकि यह अन्य
ग्रंथियों से निकलने वाले हार्मोन को नियंत्रित करती है.
यह शरीर में growth और B.P. को नियंत्रित करती है.
थायरॉइड ग्रंथि (Thyroid Gland): यह गर्दन मे स्थित ग्रंथि है जो चयापचय रेट, (metabolic rate) और ऊर्जा के उपयोग को
नियंत्रित करती है.
अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland): यह kidney के ऊपर स्थित होती है। यह तनाव से निपटने और 'लड़ो या उड़ो' (fight or flight) प्रतिक्रिया, immunity के लिए हार्मोन (जैसे एड्रेनालाईन) स्रावित करती है.
अग्न्याशय (Pancreas): यह रक्त में शर्करा (sugar) के स्तर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन और ग्लूकागोन का उत्पादन करती है.
पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland): यह मस्तिष्क में स्थित होती है और मेलाटोनिन (melatonin) का स्राव करके नींद-जागने के चक्र (sleep-wake cycle) को नियंत्रित करती है.
हाइपोथैलेमस (Hypothalamus): यह मस्तिष्क का एक हिस्सा है जो nervous system को अंतःस्रावी तंत्र से जोड़ता है और पिट्यूटरी ग्रंथि के माध्यम से कई कार्यों का नियमन करता है.
जनन ग्रंथियां (Gonads): पुरुषों में वृषण (Testes) और महिलाओं में अंडाशय (Ovaries) प्रजनन हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन) उत्पन्न करते हैं.
देखा आपने, Dr's छोडके हमे सर्वसामान्य व्यक्तीयों को पता हि नहीं होता है कितनी सारी प्रक्रियाये अपने शरीर में होती है, वो भी बिना कोई चाहत, या कोई ऑर्डर.
यह सब ईश्वर का करिष्मा है, जादूभरी प्रक्रियाये से खचा खच भरा है हमारा शरीर.
आईये चले आज हम हमारे अंतःस्रावी ग्रंथियो को दिल से कृतज्ञता पूर्वक धन्यवाद करते है और उनकी कार्यप्रणाली को अच्छे से चलाने की प्रार्थना करते हैं.
33. आज हम बात करेंगे,शरीर को शरीर शुद्धि (detox) करने मदत करनेवाले lymphatic system की, लिम्फैटिक सिस्टम (लसीका तंत्र) शरीर का एक महत्वपूर्ण नेटवर्क और cleaning system है .
यह नसों, ग्रंथियों और अंगों (जैसे प्लीहा और थाइमस) से बना होता है जो immune system को मजबूत रखने, अतिरिक्त द्रव्य पदार्थ को बाहर निकालने, और intestine से fat को निकालने का काम करता है.
लसीका (Lymph): रक्त से छना हुआ एक रंगहीन, पारदर्शी तरल पदार्थ जो सफेद रक्त कोशिकाओं (WBC) से भरपूर होता है。
यह संक्रमण से लड़ने में मदद करता है.
लिम्फ नोड्स (Lymph Nodes): ये मटर के आकार की छोटी ग्रंथियां होती हैं (जैसे गले, कांख और जांघ में) जो लसीका द्रव से बैक्टीरिया और मृत कोशिकाओं को छानकर बाहर निकालती हैं.
लिम्फ वाहिकाएं (Lymph Vessels): यह नसों का एक जाल होता है जो लसीका द्रव को पूरे शरीर में प्रवाहित करता है.
प्लीहा (Spleen) और थाइमस (Thymus): ये मुख्य अंग हैं जो लिम्फोसाइट्स (सफेद रक्त कोशिकाएं) बनाते हैंऔर रक्त को साफ करते हैं.
प्रमुख कार्य द्रव्य संतुलन (Fluid Balance): यह glands में जमा अतिरिक्त द्रव पदार्थ (इंटरस्टिशियल द्रव) को इकट्ठा कर वापस रक्तप्रवाह में भेजता है, जिससे सूजन नहीं होती है.
(Immunity): लिम्फ नोड्स में मौजूद सफेद रक्त कोशिकाएं शरीर में प्रवेश करने वाले वायरस और बैक्टीरिया पर हमला करके उन्हें नष्ट कर देती हैं.
Fat का अवशोषण: यह छोटी अंतड़ी (intestine )से पचे हुए चर्बी और विटामिनों को अवशोषित करके रक्त में मिलाने में मदद करता है.
देखा आपने, हर एक छोटी छोटी दिखनेवाली चीज भी कितने बडे बडे काम करती है.
जैसे मूर्ती छोटी, किर्ती मोटी.
आईये चले, इन सबके कार्यों का सन्मान करते हुए, दिल से धन्यवाद देते है.
34. आईये आज हम अपनी nervous system को समझते हैं.
(Nervous System) मानव शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र है जो सोचने, समझने, महसूस करने, और अंगों के बीच समन्वय स्थापित करने का कार्य करता है.
यह शरीर के भीतर और बाहरी वातावरण से संकेत प्राप्त कर उन्हें प्रतिक्रिया में बदलता है.
(CNS - Central Nervous System):यह मुख्य कमांड सेंटर है,मस्तिष्क (Brain): सभी विचारों, भावनाओं और शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करता है.
(Spinal Cord): यह मस्तिष्क और शरीर के अन्य भागों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान करता है.
PNS - यह (Nerves) का एक जाल है जो (CNS) को शरीर के बाकी हिस्सों, अंगों और मांसपेशियों से जोड़ता है.
यह हमे जो करनी है ऐसी क्रियाओं (जैसे हाथ-पैर हिलाना) को नियंत्रित करता है और अपने आप होनेवाली क्रियाओं (जैसे सांस लेना, पाचन, और दिल की धड़कन) को नियंत्रित करता है.
मस्तिष्क और शरीर के बीच सूचनाओं का संचार सिर्फ यह system कराती हैं.
कितनी सारी सिस्टीमस हमारे शरीर में एकसाथ, बिना कोई चाहत के,विनातक्रार हमारे जनम से हि 24/7/365 days काम कर रहा है. हमारा कम से कम कृतज्ञता भरा धन्यवाद करना तो बनता ही है ना.
So, Thank you our nervous system for your wonderfull and increadible work .
35. आजकल हम शरीर कि चुपचाप से चलने वाली कार्य प्रणालीयों को धन्यवाद कर रहे है.
आज जानेंगे अपनी muscular system को.
Muscular System जो गति, स्थिरता और रक्त संचार को नियंत्रित करती है.
मानव शरीर में लगभग 600 मांसपेशियां होती हैं, जो मांसपेशियों से शरीर को आकार और ऊर्जा प्रदान करती हैं.
इसके मुख्य कार्य और प्रकार शरीर को चलने, दौड़ने और उठने-बैठने में मदद, हर activity करना,ऊष्मा उत्पन्न करना जो
मांसपेशियों के सिकुड़ने और फैलने से शरीर में गर्मी तयार करना है.
रक्त संचार और पाचन: हृदय और पेट की मांसपेशियों द्वारा रक्त और भोजन को आगे बढ़ाना.
मांसपेशियां मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं.
Skeletal Muscles: यह ऐच्छिक (आपकी इच्छा के अनुसार काम करने वाली) मांसपेशियां होती हैं जो हड्डियों से जुड़ी होती है.
ये शरीर को चलने फिरने, acticity में मदद करती हैं
Smooth Muscles: यह हमारे इच्छा से ना चलनेवाली मांसपेशियां (जो खुद से काम करती हैं) होती हैं, जो हमारे आंतरिक शरीर (जैसे पेट, intenstine) में पाई जाती हैं .
हृदय मांसपेशी (Cardiac Muscles): यह हृदय में पाई जाने वाली विशेष हमारे इच्छा बिना चलनेवाली मांसपेशी है जो बिना रुके जीवन भर रक्त को पंप करती रहती है.
हम सभी कभी न कभी muscular pain से परेशान होते है. इनके कार्य हमे actual मे पता नही होते है.
आओ चले आज इन muscular system को मन से धन्यवाद कहते है और अपने muscles को तरोताजा करते है.
36. आज हम अपने शरीर को खडा करनेवाले और उसे एक आकार देनेवाले skeleton system( अस्थिपंजर) को अच्छे से समझेंगे.
Skeleton System- हड्डियों, कार्टिलेज और जोड़ों का एक जटिल ढांचा है जो हमारे शरीर को आकार देता है,
उसे सहारा देता है और इंटर्नल organs की रक्षा करता है। एक वयस्क मानव शरीर में कुल 206 हड्डियाँ होती हैं.
इसके मुख्य कार्य
1)आकार और सहारा: यह शरीर को सीधा खड़ा रहने और एक निश्चित आकार देने में मदद करता है.
सुरक्षा: यह नाजुक इंटर्नल organs को नुकसान से बचाता है; जैसे skull मस्तिष्क को और पसलियां (Ribs) फेफड़ों व हृदय को सुरक्षित रखती हैं.
गति (Movement): हड्डियों से मांसपेशियां (Muscles) जुड़ी होती हैं, जिससे हम आसानी से चल-फिर और काम कर सकते हैं.
रक्त निर्माण: हड्डियों के अंदर 'अस्थि मज्जा' (Bone Marrow) में लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) बनती हैं.
कार्टिलेज -यह हड्डियों के सिरों को मुलायम और लचीला बनाता है ताकि जोड़ आसानी से मुड़ सकें.
लिगामेंट्स (Ligaments): रेशेदार ऊतक जो एक हड्डी को दूसरी हड्डी से जोड़ते हैं.
टेंडन (Tendons): ये मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ते हैं.
यह सब system पर specially पृथ्वी तत्व का प्रभाव होता है.
आईये चले आज हमने अपने skeleton प्रणाली को अधिक से जाना.या सब पढने के बाद तो आप का दिल अपनेआप दिलसे शुक्रिया अदा करेगा.
So Thank you hamari skeleton प्रणाली.
37. सभी को सुंदर दिखने को पसंद होता हैं.
उसके लिये क्या क्या नहीं करते है. आज हम उसी त्वचिय प्रणाली को देखेंगे.
यह प्रणाली बाहरी वातावरण और शरीर के आंतरिक अंगों के बीच एक समूह है जो शरीर के बाहरी आवरण का निर्माण करता है.
इसमें त्वचा, बाल, नाखून और ग्रंथियां शामिल हैं, जो बाहरी वातावरण से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं. पृथ्वीतत्व इनका प्रतिनिधित्व करता है.
त्वचा (Skin): शरीर का सबसे बड़ा अंग, जो बैक्टीरिया और हानिकारक तत्वों से बचाता है.
बाल (Hair): सिर, आँखों और नाक को धूल और ठंड से बचाते हैं.
नाखून (Nails): उँगलियों और पैर के पोरों की चोट से रक्षा करते हैं.
ग्रंथियाँ (Glands): पसीना और तेल बनाने वाली ग्रंथियाँ, जो शरीर का तापमान नियंत्रित
पसीने के जरिए शरीर को ठंडा करके रखती है.
संवेदना (Sensation): स्पर्श, दर्द, और तापमान को महसूस कराता है.
उत्सर्जन (Excretion): पसीने के माध्यम से शरीर के दूषित पदार्थों को बाहर निकालता है.
देखा आपने सिर्फ सुंदरता ही नहीं तो जीवन के लिये कितनी सारी प्रणालीया, organs etc. काम कर रहे हैं, आईये सबका कृतज्ञता
पूर्वक धन्यवाद करके उन्हे आंतरिक सुंदरता देते है.
38. हर सजीव का जीवन उसकी सांसो( श्वांसो) पे निर्भर होता है.
श्वास है तो जान सलामत है.
आज हम उन्ही सांसो(श्वासो) को दिल से याद करते है.
श्वसन प्रणाली organs और tissues का वह समूह है जो शरीर को ऑक्सीजन लेने और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालने में मदद करती है.
यह जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा का उत्पादन करती है और शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
प्रथम नासिका मार्ग (Nasal) से हवा नाक के बाल और (mucus) द्वारा छनकर गर्म और नम होती है.
उसके बाद कंठ से होते हुए हवा श्वास नली (Trachea) में जाके हवा को lungs तक ले जाती है.
फेफड़े (Lungs): मानव शरीर में दो lungs होते हैं.
Lungs में स्थित छोटी गुब्बारे जैसी थैलियाँ, जहाँ ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान होता है.
ऑक्सीजन रक्त में मिल जाती है और रक्त की कार्बन डाइऑक्साइड दूषित हवा बाहर निकल जाती है.
यह कार्य जनम से हि शुरू होके अंततक चालू रहता है, बिना किसी सॅलरी के, ना किसी बोनस से, नाही अपनी ताकद से.
चलिये, आज हम हमारी हर श्वास को मन,बुद्धी और दिलसे शतशः प्रणाम करके कृतज्ञता व्यक्त करते है.
Thank you श्वासो हमे जिंदा रखने के लिये.
DIABETES REVERSAL AND GOOD HEALTH